Thursday, December 29, 2016

 तर्ज़-जन्म जन्म का साथ है----।
टेक-कई जन्मों का साथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा।
    कभी न रूठो हमसे स्वामी चाहे रूठे जग सारा।।

1.  गवाह हमारे प्यार के सूरज चाँद सितारे।
     त्रेता में तुम राम बने और हम वानर तेरे प्यारे।
       द्वापर में हम ग्वाले बने और कृष्ण रूप तुम धारा।।

2.  कलियुग में तुम सतगुरु सन्त रूप में आये।
     कई कोटिन जीवों में हम तेरे गुरुमुख कहलाये।
      हर युग में हम तुझसे जुड़े हैं ये सौभाग्य हमारा।।

3.  सपने में भी सतगुरु ये बन्धन न टूटे।
     तुझसे प्रेम पुराना संग कभी न छूटे।
      प्रीत का मार्ग अति कठिन है तेरा एक सहारा।।

4.  हर पल ध्यान हो तेरा ये ही विनय हमारी।
     आठों पहर आँखों में बसे ये सूरत प्यारी।
      मरते दम हो नाम ज़ुबाँ पर ""प्रेमी'' कहे पुकारा।।

Thursday, December 1, 2016

-कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।

  तर्ज़--बच्चे मन के सच्चे------।
  टेक--कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।
     कब से आस लगाये बैठे खाली झोली भर दो।।

  1.    सृष्टि के हर कौने में तेरी दया की धूम मची।
      जो भी आया शरण तेरी उस पर तूने रहमत की।
        शान तेरी को सुन करके झोली फैलायी तेरे दर पे।
        अपनी प्रेमा भक्ति से प्रभु जी इसको अब तो भर दो।।

  2.    मेरे ह्मदय मन्दिर में नाम की अनुपम ज्योति जगे।
      लिव लग जाये चरणों से दिल में बस तू ही तू रहे।
        ये है मेरे दिल का भाव और नहीं है कुछ भी चाव।
        करुणा के सागर सतगुरु जी इतनी दया अब कर दो।।

  3.    निशदिन तव चरणों के संग जुड़ी रहे तार मेरे दिल की।
      इक पल कभी न दूर होऊँ मन्ज़ूर करो प्रभु विनती।
        तुम ही हो बस दास के मीत पाऊँ सदा तेरी निर्मल प्रीत।
        ये उपकार नहीं भूलूँगा अपनी भक्ति का वर दो।।

Thursday, November 17, 2016

दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।

तर्ज़--दिल लूटने वाले-----।
टेक--दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।
                मालिक की भक्ति कमा करके इस जन्म का लाभ उठाना है।।

1.इस दुर्लभ देहि की महिमा सन्तों ग्रन्थों ने उचारी है।
        इस जीवन की जो करता कदर उसे कीमत मिलती भारी है।
            हर घड़ी हर पल हर स्वांस स्वांस मालिक का नाम ध्याना है।।

2.तेरे जीवन का जो मकसद है सतपुरुष तुझे बतलाते हैं।
        अपने सुन्दर उपदेशों से प्रभु की पहचान कराते हैं।
            सतगुरु की पावन सेवा कर लोक और परलोक बनाना है।।

3.है असली काम तेरा जग में केवल प्रभु की भक्ति करना।
        सिवा इसके दीगर कामों में तुम चित को कभी नही धरना।
            दुनियाँ के बखेड़ों में फँसकर मकसद को नहीं भुलाना है।।

4.यह लक्ष्य तभी होगा हासिल जब दास गुरु का बन जायेगा।
        होगा जीवन सफल तेरा जब सतगुरु के गुण गायेगा।
            चलकर श्री मौज और आज्ञा में सतगुरु प्यारे को रिझाना है।।

Friday, November 11, 2016

रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।

तर्ज़--बड़ा बेदर्द जहाँ है ये----।
        टेक--प्रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।
                जैसे भी हो सके तो जल्दी ही आना।।

        1.        तुमसे बिछुड़ कर मेरे प्रीतम दिल को चैन न आये।
                  हर समय दुःख गम के बादल रहते दिल पे छाये।
                    दर्श की प्यासी आँखें हर पल पल ये तड़पें।
                        मुश्किल हो जाता है इक पल बिताना।।
        2.        तुम बिन सूनी सूनी लगती नगरी श्री आनन्दपुर की।
                  विरह अग्नि सी बढ़ जाती है पीर मेरे ह्मदय की।
                    लगे सब ओर अन्धियारा सूझे न कोई किनारा।
                        दुखी दिल को प्रभु धीर बँधाना।।
        3.        दिल का हाल सुनाऊँ किसको तुम बिन कौन है मेरा।
                  तुम संग ही बहारें मुझको जीवन में भी उजेरा।
                    सुन लो दिल की पुकार मेरे दयालु दातार।
                        अपने विरद की लाज बचाना।।
        4.        करुणा के सागर मेरे स्वामी जल्दी देना दीदार।
                  आपके श्री चरणों में दास की अर्ज़ ये बारम्बार।
                    न देखना मेरे अवगुण करना ये रहमत भगवन।
                         प्यासी अँखियों की प्यास बुझाना।।

Sunday, November 6, 2016

झल्ली जांदी न जुदाई सोहणे पीर दी

टेक-झल्ली जांदी न जुदाई सोहणे पीर दी, न किसे दा प्यारा बिच्छड़े।
    होवे अखिआं तों ओहले सोहणा यार जी, पैण बे-शुमार दुःखड़े।।
4.प्रेम सच्चे दा मैं हाल हाँ सुणावंदा। बिना गुरु दे ना होर कुझ भांवदा।
   लग्गे होण ढेर दौलतां हज़ार जी, ना किसे दा प्यारा बिच्छड़े।।
5.दस्सां गुरु दे विछोड़े वाला हाल जी। बिते इक दिन बराबर कई साल जी।
  कदी आँवदा ना सबर करार जी, ना किसे दा प्यारा विच्छड़े।।
7.इक पीर बिना सुन्ना दिससे जग्ग जी। लाटां मारदी जुदाई वाली अग्ग जी।
   दर्शन गुरु दा सीने नूँ देन्दा ठार जी, न किसे दा प्यारा विच्छड़े।।
8.'सतनाम जी'जुदाई झल्ल सके ना। याद कर "मस्ताना जी' नूं थके ना।
    नालों एस जुदाई देन्दा मार जी, ना किसे दा प्यारा विच्छड़े।।

Wednesday, November 2, 2016

छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।

तर्ज़-सबसे सुन्दर------।
टेक-छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।
        महिमा श्री सतगुरु जी की फैली सब संसार।।
            सदा तेरा प्यार पाऊं, और तुझको ही ध्याऊं।।
1.    निर्मल प्यार है पाया , प्रभु चरण शरण में आके।
        पाया प्रभु अविनाशी, कई जन्मों के भाग हैं जागे।
            पूरा सतगुरु पाया हमने, महिमा जिनकी अपार।।
2.    नाम को जपने वाला, होता है गुरु को प्यारा।
        अन्तर्मुख हो जो रहता , रहता जग से न्यारा।
            ज्ञान की ज्योति जगाते भगवन, गुरु हैं बख्शनहार।।
3.    अनहद नाद सुनाकर, सब कारज करते रास।
        शब्द की है ये कुन्जी, पूरे सतगुरु के पास।
            कई जन्मों के पुण्य करम से पाया है गुरुद्वार।।
4.    भाग हमारे जागे पाये हमने प्रभु प्यारे।
        खुशनसीब हैं सब पाये जो सुन्दर नज़ारे।
            यहाँ मिलेगा ऐसा हमको बिन स्वार्थ का प्यार।।
5.    धन्यवाद गुरु का दासा, शुक्रिया बारम्बार।
        एहसान गुरु का भारा, महिमा है अपरम्पार।
            भक्तों के आधार प्रभु हैं सन्तों के सिरताज।।

Thursday, October 27, 2016

इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।

तर्ज़-तुझे सूरज कहूँ या चन्दा----।
टेक-इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।
    दुनियाँ जिसे सीस झुकाती वो है दरबार तुम्हारा।।

1.गुरुदेव के दर्शन करना शुभ कर्मों का ही फल है।
  बिन भाग न दर्शन होते समझो यह बात अटल है।
  भगवान ने ही इस युग में लिया परमहँस अवतारा।।

2.प्रेमा भक्ति शान्ति का बस यही एक खज़ाना है।
  मिली सच्ची राहत उऩको जिन्होने इनको माना है।
   श्री मुख से रोज है बहती वचनों की अमृत धारा।।

3.यह परमार्थ का तकिया यह एक दरबार रूहानी।
  है फकीरी भी गोया यहाँ की है तख्ते सुलेमानी।
  छू लेता नील गगन को दरबार का जैकारा।।

4.सेवा सत्संग भजन के उपहार यहां से मिलते।
  पलटे हालत इस मन की अन्तर के पट हैं खुलते।
  जीवन रूपी कश्ती का दासा यही किनारा।।

Saturday, October 22, 2016

तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।

तर्ज़-बहुत प्यार करते हैं-----।
    टेक-तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।
         रूठे हो तुम जो मनायेंगे हम।।
    1.  जग से मिली है हार करारी।
           तभी तेरे दर पे है झोली पसारी।
              दुखड़ा ये दिल का सुनायेंगे हम।।
    2.  कर्मों के मारे तुझको पुकारें।
           जीये जा रहे हैं तेरे सहारे।
              आखिर तो मन्ज़िल को पायेंगे हम।।
    3,  तुम न सुनोगे कौन सुनेगा।
           पथ के ये काँटे कौन चुनेगा।
              भटके हुए कहाँ जायेंगे हम।।
    4.  दासनदास की ये ही पुकार।
           सदा मेरे दिल में हो तेरा ही प्यार।
              दर्शन तेरा पायेंगे हम।।

Tuesday, October 18, 2016

असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।

टेक-असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।
         मुखों जय जय गुरां दी बोल वे।।
    1.   ओदे नाम दी महिमा भारी।
             उत्थे जांदे ने कुल संसारी।
                चल तू वी न जीवन रोल वे।
                     छेती करले तू बिस्तर गोल वे।।
    2.   छड दुनियाँ दे झूठे चाले।
             सतगुरां दे दर्शन पाले।
                 क्यों फिरना तू डावांडोल वे।।

    3.   उत्थे तैंतीस करोड़ी देवता आउँदे।
             मेरे शाम जी दी महिमा नूं गाऊंदे।
                 नाले खुशियां दे वजदे ढोल वे।।

    4.   उत्थे नाम दी जोत पई जगदी।
             ज्ञान भक्ति दी गंगा वगदी।
                 तू वी भर लै अपनी झोल वे।।

    5.   चल पहली गड्डी ते चलिये।
             प्रेमी बुआ गुरां दा मलिये।
                 तेरा हीरा जन्म अनमोल वे।।

Friday, October 14, 2016

मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।

टेक-मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।
                 इक वारी प्यास बुझा जा वे।।
1.में रो रो देआं दुहाइयां वे, तेरे इश्के मार मुकाइयां वे।
    हुण सह ना सकां जुदाइयां वे, सुण मेरे महरम साँइयाँ वे।
      मेरे पीड़ करदे जख्मां दे, आके दीद दवाई लाजा वे। मेरा हाड़ा----।
2.मैं झूठ ना सज्जणा बोलां वे, मैं कुफ्र ना सज्जणा तोलां वे।
    तेरे इश्के मैनूं फूक दित्ता, दिल सड़ के होया कोला वे।
      इह दस्सण वाली गल्ल नहीं, मैं कित्थे पावां रौला वे।
        मुड़के इश्के दी अग्ग भखा के ते, कोले नूं सुर्ख बणाजा वे।
3.प्यार पाउण तों पहलों जाणू सै, इह प्यार निभाउणा पैणा है।
    इस प्यार विच सज्जणा सुख कित्ते, कुझ कष्ट उठाउणा पैणा है।
      हुण पैंडा सज्जणा छुटणा नहीं, तैनूं दीद दखाउणा पैणा है।
        दीद बूंद तों  प्यासी मर गई जे, पिछों भावें बण घटा आजा वे।
4.जो इश्क तेरे नाल लाया है, नाल जान मेरी दे जावेगा।
    इह रोग अवल्लड़ा लगिआ है, जो मैनूं मार मुकावेगा।
      इहदी इक्को ही दीद दवाई है, जो तेरे कोल बताई है।
        इक पल वी मेरी आस नहीं, तूं समझें रोगी खास नहीं।
           फिर पुछेगंा तूं सज्जणा वे, इह किसदा है जनाजा वे।
5.जे सज्जणा तूं नहीं आ सकदा, जे मुखड़ा नहीं दिखा सकदा।
   खैर प्यार दी जे नहीं पा सकदा, जे कष्ट तूं नहीं उठा सकदा।
    मैं कष्ट तैनूं हुण देणा नहीं, बस फिर कदे वी कहणा नहीं।
      बस इक्को ही इच्छा मेरी जी, हुण जद वी पाओगे फेरी जी।
       इह मेरी सी बस गल्ल इतनी, मेरी कब्रा ते तूँ लिखवाजा वे।
           मेरा हाड़ा सज्ज्णा----।

Sunday, October 2, 2016

दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।

तर्ज़-रेशमी सलवार-----।
टेक-दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।
        गायेंगे हम तेरे सदा गुणगान प्रभु।।

1.    तेरे चरणों में हम हैं आये, दिल में यह ले कर आसा।
    तेरी पावन भक्ति का ही, मनुआ सदा रहे प्यासा।
                                 करो एहसान प्रभु।।
2.    तेरी अनुपम भक्ति की महिमा, जाए न ज़ुबाँ से बखानी।
    जिस पे किरपा हो तेरी, पाता वही है प्राणी।
                                कि सुख की खान प्रभु।।
3.    तेरी भक्ति बिना ऐ स्वामी, कई जन्म हैं हम ने गँवाये।
    मन माया के धोखे में आकर, हैं कितने कष्ट उठाये।
                                करो कल्याण प्रभु।।
4.    श्री चरणों की भक्ति की बख्शिश, हम पर सतगुरु जी कर दो।
    खाली झोली है हमारी, इसे अपनी भक्ति से भर दो।
                                जायें कुरबान प्रभु।।
5.    हम जन्म जन्म दाता जी, तेरे दासनदास कहायें।
    तेरी पावन भक्ति करके, जीवन को सफल बनायें।
                                दे दो वरदान प्रभु।।

Sunday, September 25, 2016

सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है,

तर्ज- दुल्हे का सेहरा
रुबाईः-शहनाईयों की सदा कह रही है,
जन्मदिन की मुबारक घड़ी आ बई है
सजे चादं तारों में वह कमाल दिख रहें हैं,
 ज़मीं पे फल्क से मेरे भगवन आ गये हैं

मुखड़ाः-सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है, खुषियों में आज सब का मन हर्षाया है
जगमग ज्योति जगी है सबके हिरदे में, धरती पर भगवान हमारा आया है

1    तेरी रहमत का सदा यूं, हाथ हो सिर पर,
तेरा सुमरण तेरा दर्षन, करूं तेरे दर पर
तेरा यह दर्षन सुहाना पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

2    खूबसूरत यह जो घड़ियां आज आई हैं
आज जन्मदिन की लाखों लाख वधाई है
सुन्दर यह सुहाना दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है

3    तेरे जेसा रूप न देखा चादॅं सितारों में
ऐसा यह नूरानी जल्वा नहीं बहारों में
प्रेमियों ने आज तुमको पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

4    आज तेरे दर पर सचखंड का नज़ारा है
       त्रिलोकी में तेरे जेसा नहीं द्वारा है
दासों ने यह दिव्य दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है



Friday, September 16, 2016

जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।

तर्ज़--इक परदेसी मेरा दिल----।
टेक--जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।
    आके मेरी अँखियाँ दे अन्दर विराज।।

1.    मिटया अन्धेरा दुःख दर्द मेरा।
        पाया जो दर्शन सतगुरु जी तेरा।
           मेरी ज़िन्दगी दी बड़भागी दिन आज।।

2.    अखियाँ विच वस जा प्राणाँ विच वस जा।
         अँग अंग विच मेरे सतगुरु जी रच जा।
          तैनूँ पाके रहवाँ न किसे दा मोहताज।।

3.    बेड़ी पुरानी गहरा पानी।
       तेरी ही आस मैंनूँ तूं ही पार लगानी।
          तू मल्लाह तेरा नाम है जहाज़।।

4.    दुनियाँ भुलाई आस गँवाई।
         तेरे बगैर मेरा कोई न सहाई।
            दास बेचारे दे सँवार दे काज।।

Monday, September 12, 2016

हर पासे अज रौनकाँ बहारां,

तर्ज़-पहलां सतगुरु नूं अपना----।
टेक-हर पासे अज रौनकाँ बहारां,निराला कोई पीरआ गया।
    इस घड़ी उत्तों की कुझ वारां,मैं सोहणा दीदार पा लिया।।
                            कि धरती ते रब आ गया।।
1.धुरधाम तों उतरी ऐ शक्ति,चौकुण्ठी विच महिमा फैली।
     इसदे रूप दा वेख लिशकारा, जग ते निहाल हो गया।।

2.रामकृष्ण कदी नानक बनदे,हरयुग विचआंदे रूप बदल के।
  हुण रूप निराला ऐ धारा, कि भक्तां दे दिल नूं भा गया।।

3.प्रेमी जनां नूं छाई मस्ती, वेख के प्यारी सोहणी झाँकी।
    दीवाना बनाया जग सारा, निराला कोई पीर आ गया।।

4.ब्राहृा विष्णु स्तुति गाँदे, ऋषि मुनि सारे ध्यान लगांदे।
   मंगदे चरणां दा ओह वी सहारा,तेरे नाल दिल ला लिया।।

5        युगयुगराजकरोरहोसलामत,रोशन जहां मेरा तेरे नाल मालिक
          रहे सिर ते अटल तेरा साया, तेरे नाल प्यार पा लिया।।
6.    सब नूं मुबारिक कोटि मुबारिक 20 सितम्बर मुबारक।
    अज दा दिन बड़ा करमां वाला,कि मैं ता मालामाल हो गया।।
                            कि मैं ताँ निहाल हो गया।।

Thursday, September 8, 2016

दुःखी जीवों की सुन के विनय,

टेकः-दुःखी जीवों की सुन के विनय, प्रभु ने अवतार लिया।
     खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, चहुँ दिशी जयकार हुआ।।

1. दिन बीस सितम्बर का, सन् उन्नीस सौ छब्बीस था।
     छोड़ अपना धाम प्रभु जग में अवतार लिया।।
        पंचम रुप में प्रकट हो, जीवों को दीदार दिया।।
2. पाप धरती पे जब था बढ़ा मच रही थी हाहाकार।
     आए जगत में कुल मालिक, करने सृष्टि का उद्धार।।
        यही लक्ष्य है इनका केवल, दुनियाँ में आने का।।
3. भेष सन्तों का धर कर, युग युग प्रभु आते हैं।
     भूली भटकी रुहों को, सतमार्ग दिखाते हैं।।
        अपने श्री चरणों का, देते हैं सहारा सदा।।
4. हम जीवों पे प्रभु ने, किया कितना है उपकार।
     प्रेमा भक्ति का अनुपम यह खोला है दरबार।।
        बलिहार सदा जाएं, एहसान जो हमपे किया।।
5. हम जीवों की प्रभुवर, बस यह है अभिलाषा।
     तेरे भिक्षुक बन करके, तेरे द्वारे पे रहें सदा।
        श्री चरणों के दास बने, करें निशदिन दर्श तेरा।।

Thursday, September 1, 2016

पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं

तर्ज़--जी मैं लख लख खुशियाँ------।
    टेक--पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं सुखाँ दा भण्डार पा लिया।
            सतगुराँ जी नूं अपना बणा के नवाँ संसार पा लिया।।
    1.        बहुत गुराँ जी दी होई मेहरबानी ए।
              बख्शी जिन्हाँ ने सच्ची दात रुहानी ए।
                सुत्ते जाग पये कर्म ने मेरे जो साहिब दा दीदार पा लिया।।
    2.        गुरु दरबार दी ऐ ही पढ़ाई ऐ।
              सिधी ऐही गल जिन्दी समझ विच आई ए।
                बहुत लोड़ नहीं पढ़न पढ़ान दी भेद असाँ सार पा लिया।।
    3.        मोह माया ने पाया सी घेरा।
              रंग ढंग सारा बिगड़िया सी मेरा।
                ऐसा प्रेम दा जादू चलाया बन्धन तो छुटकार पा लिया।।
    4.        शरण गुराँ दी असीं जे न आँदे।
              पता नहीं कित्थे कित्थे धक्के होर खाँदे।
                पुण्य कर्म दी ऐही निशानी ऐ सच्चा दरबार पा लिया।।
    5.        उपकार गुराँ जी दे किवें सुनाईये।
              चरण कमल सदा ह्मदय वसाईये।
               जेहड़ा सबनूँ बख्शनहारा ओ सच्चा करतार पा लिया।।
    6.        दास गुराँ जी दा द्वार न छोड़ीं।
              गुरु सेवा तो कदी मुँह न मोड़ीं।
                जेहड़ी शै न कित्थे मिलदी ऐत्थे औ भण्डार पा लिया।।

Sunday, August 28, 2016

मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।

तर्ज़--साजन साजन-------।
 टेक--मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।
नहीं ताकत मुझमें करूँ जो ब्यान।।

1.        छोड़ अर्श को फर्श पे आये हो तुम।
अपने भक्तों के दिल की पुकार को सुन।
रहमत के सागर तुम भगवान।।

2.        लाखों कष्ट उठाये हमारे लिये।
गम चिन्ता फिकर सब दूर किये।
नहीं तुझसा कोई दुनियाँ में दयावान।।

3.        देकर नाम का धन कर दिया भरपूर।
भर दिया मेरे दिल में अपना ही नूर।
करूँ क्यों न अपनी किस्मत पर मान।।

4.        तेरा दामन नहीं छोड़ेंगे कभी।
दास तुझपे निसार करेंगे ज़िन्दगी।
जब तक मेरे इस तन में हैं प्राण।।

Wednesday, August 24, 2016

री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।

तर्ज़-रामचन्द्र कह गये-------।
        टेक-श्री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।
                जिसमें भला हमारा है यह भेद हमें बतलाते हैं।।

        1.        सतगुरु जैसा मीत नहीं कोई, और जगत में पाया है।
                भूले भटके जीवों को जो, राह सीधी दिखलाते हैं।।

        2.        निर्भर अपने ख्यालों पे है, जीव का दुःखी सुखी होना।
                इसीलिये ये सतसंगत की, महिमा सदा फरमाते हैं।।

        3.        अपने साथ मिलाने आये, पर उपकारी सतगुरु मेरे।
                जिनकी संगत सोहबत से,बिगड़े कारज बन जाते हैं।।

        4.        वही सुखी प्राणी है जग में, जिन्हों को प्रभु प्यार मिला।
                जगत की झूठी मोह ममता में, वह न कभी भरमाते हैं।।

        5.        दासनदासा गुरु वचनों का, मिला जो हमें खज़ाना।  
                वही राह अपनायें सदा, जिस राह पे सन्त चलाते हैं।।

Monday, August 22, 2016

बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।

तर्ज़--पूजो पूजो रे प्रेमियों-------।
टेक--बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।
बाँधा जिसने भी प्रेम का धागा रे-2 ।
उसकी रक्षा करेंगे बन के साथी।।   

1. पक्का धागा ऐसा बाँधो डोर न टूटने पाये।
    हर संकट से उनको बचाते जो शरण में आये।
    बाँधा जिसने भी-------।।
   
2. प्रेम का धागा बाँधो भाई आज है राखी आई।
    सतगुरु को हमराज़ बना लो जो लोक परलोक सहाई।
     बाँधा जिसने भी-------।।

3. बहना जैसी प्रीत तू रखना सतगुरु संग ऐ दासा।
   भ्रातः जैसा नेह रखेंगे तुम संग सतगुरु दाता।
    बाँधा जिसने भी-------।।

4. सतगुरु तेरा राहबर साचा सबके हैं हितकारी।।
    बाँध के डोरी सतगुरु को तू सौंप दे ज़िम्मेवारी।
    बाँधा जिसने भी--------।।

Thursday, August 18, 2016

क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।

तर्ज़--    कोई जब राह न पाये------।
टेक--    क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।
    कि तुझ से नेह लगाये, पाये वही धन सार।।
  
1.    पाकर तेरा साचा प्यार।
      नाश होवे मोह का अंधियार।
        भूल जाये उसको संसार।
        तेरे ही गुण गाये न और कुछ चाहे।।
  
2.    कंगले से होवे धनवान।
      प्रीत तेरी का पीकर जाम।
        दुनियाँ से फिर क्या उसको काम।
        तन मन तुझ पे लुटाये कि तेरा बन जाये।।
  
3.    दासा सतगुरु हैं सुखधाम।
      कैसा प्यारा प्यारा है नाम।
        सबसे ऊँचा है इनका धाम।
        निज घर को वह पाये जो आप मिटाये।।