Saturday, March 26, 2016

रंग दो जी मुझे अपने रंग में तमन्ना बड़ी ये कब से।

तर्ज़--तेरे चेहरे से-----।
टेक--रंग दो जी मुझे अपने रंग में तमन्ना बड़ी ये कब से।
जो न उतरे कभी भी ऐसा चढ़ाना रंग मुझ पे।।

1. तुमने लाखों को रंग डाला।
देकर अपना रंग निराला।
तेरी रहमत को सुन करके।
आया मैं सवाली बन के।।
2. जन्मों की बिगड़ी बन जाती।
जिसपे तेरी किरपा हो जाती।
गीत तेरे सदा वो गाये।
बलिहारी जाये तुझ पे।।
3. रंगरेज़ तू है बड़ा महान।
फैली है महिमा सारे जहान।
जन्मों का मैला मन भी।
रंग देते इक पल में।।
4. दास पे भी ज़रा रहमत कर दो।
अपने प्रेम के रंग में रंग दो।
करो विनती मेरी मन्ज़ूर।
          चरणों पे जाऊँ सदके।।

Thursday, March 24, 2016

तेरी रहमत से प्रभुवर, मिल गई मन्ज़िल मुझे।

तर्ज़-आपकी नज़रों ने समझा-----।
टेक-तेरी रहमत से प्रभुवर, मिल गई मन्ज़िल मुझे।
 खुशनसीबी से मिले जब, पीर तुम कामिल मुझे।।

1. क्यों फिरूँ अब मारा मारा, झूठे जग के प्यार में।
मिल गई है शरण मुझको, आप के चरणार में।
अब फँसायेगी भला क्या, माया की दलदल मुझे।।
2. नाव मेरी तो प्रभु जी, अब हवाले है तेरे।
कैसा डर तूफानों का जब हो खेवैया तुम मेरे।
अब तो मिल ही जायेगा, खुद-ब-खुद साहिल मुझे।।
3. राहे-भक्ति पर चलूं मैं , झूठे जग से तोड़ के।
सदा ही रखूं तार दिल की, श्री चरणों से जोड़ के।
अपने दीवानों में करना, है प्रभु शामिल मुझे।।
4. मेरे सिर पे तुम धनी हो, फिर भला कैसा फिकर।
गाऊँ महिमा तेरी हरदम, और करूँ तेरा ज़िकर।
एक पल भी दृष्टि से न, करना कभी ओझल मुझे।।
5. दासा तन मन और चित्त से, कर प्रभु आराधना।
इसके सिवा दिल में तेरे, रहे न कोई कामना।

Wednesday, March 23, 2016

-परमहँसों की दिव्य ज्योति से रोशन हुआ जहान।


तर्ज़--देख तेरे संसार की------.
टेक--परमहँसों की दिव्य ज्योति से रोशन हुआ जहान।
ये हैं परम पुरुष महान।।

1. प्रेम भक्ति का पथ दर्शाया बिछुड़ी रुहों को है मिलाया।
श्री चरणों में दिया हमें है श्री सतगुरु ने स्थान।।

2. नाम का खोल दिया भण्डार घर घर फैला है प्रचार।
आरती पूजा सेवा सत्संग करो भजन व ध्यान।।

3.मिला हैदुर्लभ तनइन्सानी इसकी कदर तू करले प्राणी।
सन्त शरण में आकर के तू कर आत्म कल्याण।।

4.ज्ञानकीज्योति ह्मदय भरलोसुखमय जीवनअपनाकर लो।
खोल दिखाया घट भीतर जो आनन्द सुख की खान।।

5.सतपुरुषोंकी सुनले वाणी उसपरअमल तू करले प्राणी।
दासन दास तू कर दे अपना तन मन धन कुर्बान।।

Monday, March 21, 2016

दिल के चमन में फिर से छा गई खुशहाली।

तर्ज़--बाजरे दा सिट्टा----।
टेक--दिल के चमन में फिर से छा गई खुशहाली।
  आ गया है घर में कुल दुनियाँ का वाली।।
1. व्याकुल दिलों की पीर मिटाई देकर सुन्दर दर्शन।
रहमत का मेंह बरसाकर कर दिया शीतल तन मन।
  चरणों पे जाऊँ वारी मिटा दी दुविधा सारी।
   विरह में डूबी मेरी नैया आकर के बचा ली।।
2. आज मुबारकबाद हो सबको प्रीतम घर में आये।
अपने संग साथ में है नई बहारें लाये।
 गीत खुशियों के गायें धन धन भाग मनायें।
  आ गई है फिर से घर में आज दीवाली।।
3. रहमत का सागर मौज़ में आकर हुआ दयाल।
रंक को इक पल के अन्दर कर दिया मालामाल।
 क्या उपकार सुनाऊँ बदला कैसे चुकाऊँ।
    अपनी इस बगिया की करने आये खुद रखवाली।
4. धन धन मेरे प्रीतम प्यारे धन धन आपकी महिमा।
तुझसा दयावान दुनियाँ में देखा और कहीं ना।
  पर उपकार की खातिर लाखों कष्ट उठाकर।
   अपनी बिछुड़ी रुहें आकर के सँभाली।।

Saturday, March 19, 2016

-भक्ति प्रेम और सच्चे सुख का ये है केन्द्र महान

तर्ज़--देख तेरे संसार------।
टेक--भक्ति प्रेम और सच्चे सुख का ये है केन्द्र महान।
सज्जनों श्री आनन्दपुर स्थान।।

1.शान है इसकी अजब निराली खूब सजा दरबार हैआली।
  जो भी आवे बन के सवाली जाये न वह हरगिज़ खाली।
    श्रद्धा भाव से जो भी आवे पावे सच्चा मान।।

2. श्री मन्दिर का भव्य नज़ारा लगता कैसा प्यारा प्यारा।
   बहती प्रेम अमृत की धारा सुख शान्ति का चले फव्वारा।
         प्रेमी जन हैं मज्जन करते गाते हैं गुण गान।।

3.भक्तों का आधार बना है मुक्ति का यह द्वार बना है।
  खुशियों का आगार बना है दुखियों का गमख्वार बना है।
       गम का मारा जीव जो आवे पावे सुख महान।।

4. क्यों न अपने भाग मनायें दर्शन पायें शीश झुकायें।
   दासा चरणों पे बलिबलि जायें तनमन धन सब भेंट चढ़ायें।
दीन भाव से जो भी आवे पावे भक्ति दान।।

Friday, March 18, 2016

नाचें गायें खुशियाँ मनायें

तर्ज़--प्यासे पंछी नील गगन--------।
टेक--नाचें गायें खुशियाँ मनायें शुभ सन्देश है आया।
     सद बलिहारी उस पे जायें पैगाम खुशी का जो लाया।।

1.बड़ी मुद्दत से आस लगी थी श्री दर्शन पाने की।
    मिलकर देवो सभी मुबारिक प्रीतम के आने की।
    ज्यों ही खबर पड़ी कानों में मेरा रोम रोम हर्षाया।।

2.महक उठा है दिल का उपवन सुन प्रीतम का आना।
 कल आयेंगे सतगुरु मेरे गाओ खुशी का तराना।
      मिला मुझे अपार है सुख वो ज़ुबाँ से न जाये बताया।।


3.सूनी सूनी गलियों में फिर से छायेंगी बहारें।
 जीवन में नव प्राण आयेंगे मिलेंगे प्राण प्यारे।
       मिट जायेगी सब गम चिन्ता पाकर निर्भय छाया।।

4.कल आयेंगे सतगुरु मेरे हम पर उपकार कमाने।
 देकर प्यारा प्यारा दर्शन अपना दास बनाने।
  देखे नहीं अवगुण हमारे याद हमें फरमाया।।

Tuesday, March 15, 2016

दयालु मिले न तेरे नाल दा।

तर्ज़--मेरा साजन उस पार है...।
टेक--दयालु मिले न तेरे नाल दा।
        तेरे नाल दा-----2.

1.   तेरे रंग न्यारे दाता भेद ना जाने कोई।
        सन्त रूप विच प्रगट होये दुनियाँ धन धन होई।
           सुनो जी बख्शनहारे मैं आया तेरे द्वारे।।

2.   चुम चुम रखाँ मूरत तेरी नाल मत्थे दे लावां।
        तेरे इस सुन्दर मुखड़े नूँ फूल्लां नाल सजावां।
           तेरी मैं आरती गावां सुबह और शाम मनावां।।

3.   दिल मेरे दी बस्ती अन्दर तेरा रैन बसेरा।
        ऐ दुःखभञ्जन मैंनूं सहारा तेरा।।
           पुजारी बन के आया मैं रज रज दर्शन पाया।।

4.   मनमानियां मैं बहुत कीतियाँ तेरा नाम भुला के।
        चौरासी विच फँसिया बन्दा काम क्रोध विच आके।
           अजब है तेरी माया दास नूँ पार लगाया।।

Monday, March 14, 2016

जीवन नैया भव आन पड़ी इसको प्रभु पार लगा देना।

तर्ज़--दिल लूटने वाले-------।
टेक--जीवन नैया भव आन पड़ी इसको प्रभु पार लगा देना।
  इस डूबती जीवन नैया को ऐ नाथ किनारे लगा देना।।

1.संसार समुन्द्र की लहरों में निशदिन बहता जाऊँ मैं।
गम्भीर अथाह यह धारा है इसका कुछ पार न पाऊँ मैं।
 यह भीर बनी भारी मुझपर ऐ स्वामी भीर हटा देना।।

2.लहरों की दया पर है नौका पल पल में ठोकरें खाती है।
ऐसा लगता है मानो अभी पल भर में डूबी जाती है।
 लहरों के थपेड़े खाती इस नौका को पार लगा देना।।

3.बिन माँझी के ये नौका कब तक यों हिचकोले खायेगी।
   तेरा न सहारा मिले जब तक क्योंकर उस पार ये जायेगी।
पतवार सँभाल ले ऐ माँझी निजधाम के तट पहुँचा देना।।

4.इस अपने दास बेचारे पर उपकार करो उपकारक हो।
भूले भटकों का सहज सहज निस्तार करो निस्तारक हो।
  सब तजके सहारा लिया तेराअब बिगड़ी दशा बना देना।।

Sunday, March 13, 2016

-याद तेरी आती है हमको बड़ा सताती है।

टेक-याद तेरी आती है हमको बड़ा सताती है।
     तेरी ये जुदाई मेरी जान लिये जाती है।।
1.तेरा विछोड़ा हम कैसे सहेंगे,
   दिल की कहानी किससे कहेंगे।
    तुमने ही हमको सतपथ पे लगाया।
     रुहानियत का सही भेद बताया-भेद बताया।।
2.अद्वैत मत के तूने झण्डे लहराये।
   सतसंग आश्रम कई जगह बनवाये।
    मनमुखों ने कई रोड़े लगाये।
     दृढ़ता से सभी काम करके दिखाये।
3.नाम उपदेश सतगुरु का फैलाकर।
   अपने शरीर पे कई कष्ट उठाकर।
    गुरु सेवा में सारी ज़िन्दगी बिताई।
     रूहें कई इस राह पे लगाई-राह पे लगाई।।

Thursday, March 10, 2016

टेक-क्यों दिल को फँसाए तू यह देश है बेगाना।

तर्ज़-ऐ मेरे दिले नादां----।
टेक-क्यों दिल को फँसाए तू यह देश है बेगाना।
     सपने की सब रचना है धोखा न कहीं खाना।।

1.  नश्वर हैं ऐ प्राणी सारे सामान यहाँ।
       आया है फकत तू तो बन के मेहमान यहाँ।
          बेशक प्रयोग में ला पर दिल नहीं अटकाना।।

2.  जो रिश्ते बनाये हैं तुझे अन्त रुलायेंगे।
        पड़े संकट जब भी कभी ये नज़रें चुराएंगे।
           गुरु नाम ने ही आखिर है काम तेरे आना।।

3.  यहां काल और माया ने कैसा खेल रचाया है।
        गुरु कृपा बना दासा कोई छूट न पाया है।
           माया जाल कटाने को सन्तों की शरण आना।।

Wednesday, March 9, 2016

आपका दीदार पाया

तर्ज़--इक प्यार का नगमा है----।
टेक--आपका दीदार पाया, दिल को चैन करार आया।
      मिट गये सारे दुःख और गम, खुशियों का भण्डार पाया।।

1. इन नयनों में भर लूँ प्रभु तेरा सुन्दर जलवा हसीन।
     कब से तड़प रहा था ये दिल जैसे जल बिन तपड़ती मीन।
        श्री दर्शन का अमृत रस पीके मन आज तृप्ताया।।

2. रोम रोम हुआ पुलकित देखकर मनहर झाँकी।
     कोटि कोटि मुबारिक हो सबको सुन्दर सुहानी घड़ी।
        सदके वारी जाऊँ चरणौं पर रहमत मेंह बरसाया।।

3. नव उल्लास छाया है हर गली और कण कण में।
     पाई सबने अनूठी खुशी अपने प्रीतम के मिलने से।
        हो गया धन धन जीवन पाकर निर्भय छाया।।

4. आया मौसम बहारों का प्यारे सुन्दर नज़ारों का।
     हर शै हर दिल पर जी इक रंग नया छा गया।
        शोभा वर्णन कर न सकूँ सोया भाग्य जगाया।।

5. सदा सुन्दर दर्शन पाऊँ बस इतना ही मैं चाहूँ।
     करूँ निशदिन तेरी सेवा और महिमा तेरी गाऊँ।
        दास के ह्मदय में बसो माँगूँ सच्चा ये सरमाया।।


Sunday, March 6, 2016

इस दर आके दिल रखना सँभाल के।

टेकः-इस दर आके दिल रखना सँभाल के।
     इक पीर ईलाही आया, करे दिलाँ दे सौदे।।

1.   दर्शन कर दिल धक-धक करदा।
        चंगे भले जीवाँ नूँ कमला करदा।।
            कमला बनावन आया, करे दिलाँ दे सौदे।।
2.   रूप निराला ऐदी जोत निराली ऐ।
        जग  विच आया मेरा दिलबर जानी ऐ।।
            मस्त बनावन आया, करे दिलाँ दे सौदे।।
3.   आनन्दपुर विच धूमाँ छाईयाँ।
        सारे जग विच धूमाँ छार्इंयाँ।।
            घर मेरा स्वामी आया, करे दिलाँ दे सौदे।।
4.   दासनदास इस दर ते आई।
        कुल दुनियां देवे इसनूँ वधाई।
            दिन खुशियाँ दा आया।।

Saturday, March 5, 2016

तर्ज़-स्वर्ग से सुन्दर-----


शेयर-काहे जायें मथुरा काहे जायें काशी काहे जायें हरिद्वार।
      त्रैलोकी में सबसे ऊँचा श्री आनन्दपुर दरबार।
टेक- सबसे सुन्दर सबसे न्यारा है तेरा दरबार।
       बना रहे यूँ हम पे प्रीतम सदा तुम्हारा प्यार।
         तेरा दरबार न छूटे प्यार की तार न टूटे।।

1.   तुझसे नेह लगा के पाये हमने सुख सारे।
       पिछले कई जन्मों के जागे हैं भाग्य हमारे।
         कहाँ मिलेगा ऐसा सच्चा बिन स्वार्थ व्यवहार।।

2.   दीन दयालु तुम हो रहमत तेरी क्या कहना।
       तुमने सिखाया जीना सत की राहों पे चलना।
         बिना तुम्हारे सपने में भी जीना है बेकार।।

3.   तेरे श्री चरणों में बहती है प्रेम की धारा।
       इनमें है सब तीर्थ ये तीर्थ राज हमारा।
         यहां झुका के सर को हमने पाया भक्ति भण्डार।।

4.  ""प्रेमी''हैं हम तेरे तन मन धन तुझ पर वारें।
       तुम ही संग सहाई तुम ही भगवान हमारे।
         जन्म जन्म में मिले हमेशा ये पावन दरबार।।

Friday, March 4, 2016

सबसे सुन्दर सबसे न्यारा है तेरा दरबार।

तर्ज़-स्वर्ग से सुन्दर-----।
शेयर-काहे जायें मथुरा काहे जायें काशी काहे जायें हरिद्वार।
      त्रैलोकी में सबसे ऊँचा श्री आनन्दपुर दरबार।
टेक- सबसे सुन्दर सबसे न्यारा है तेरा दरबार।
       बना रहे यूँ हम पे प्रीतम सदा तुम्हारा प्यार।
         तेरा दरबार न छूटे प्यार की तार न टूटे।।

1.   तुझसे नेह लगा के पाये हमने सुख सारे।
       पिछले कई जन्मों के जागे हैं भाग्य हमारे।
         कहाँ मिलेगा ऐसा सच्चा बिन स्वार्थ व्यवहार।।

2.   दीन दयालु तुम हो रहमत तेरी क्या कहना।
       तुमने सिखाया जीना सत की राहों पे चलना।
         बिना तुम्हारे सपने में भी जीना है बेकार।।

3.   तेरे श्री चरणों में बहती है प्रेम की धारा।
       इनमें है सब तीर्थ ये तीर्थ राज हमारा।
         यहां झुका के सर को हमने पाया भक्ति भण्डार।।

4.  ""प्रेमी''हैं हम तेरे तन मन धन तुझ पर वारें।
       तुम ही संग सहाई तुम ही भगवान हमारे।
         जन्म जन्म में मिले हमेशा ये पावन दरबार।।