Friday, July 29, 2016

तर्ज़-क्या करते थे साजना-----।

तर्ज़-क्या करते थे साजना-----।
टेक-चरणों की भक्ति दो प्रभु दया की दृष्टि करके।
    हम तो हुज़ूरी में सदा ही ये भीख माँगा करते हैं।।
      तेरी सेवा और साधना में लीन रहकर।
      नाम तेरा दिल में बसाकर जीवन गुज़ारा करते हैं।।
1.लागी जो तुझसे लगन ये हमारी।
   नयनन समाई सूरत ये प्यारी।
    निशदिन ही गायें महिमा तुम्हारी।
     पलकों से झाड़ें राह तिहारी।
      तुझको सजन करके नमन प्यार तेरा जो पाये हम।
       बस याद तुझे करते हैं।जीवन गुज़ारा करते हैं।।

2.तुम ही हो सच्चे मीत हमारे।
   सब जग के ओ पालनहारे।
    तुझ संग बाँधी प्रीत की डोरी।
     नैय्या हमारी तेरे सहारे।
      कुर्बान दिलकुर्बान हमहो करके तुझमें सदा ही मगन
       बस तुझको पुकारा करते हैं जीवन गुज़ारा करते हैं।

Monday, July 25, 2016

तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।

तर्ज़-मुझे पीने का शौक नहीं----.
टेक-तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।
     प्यार चरणों का पाने को ते दर्शन को पाने को।।

1.आँखों में नज़ारों ने नई रोशनी दिखलाई।
    आया जब हुज़ूरी में सुख शान्ति है पाई।
      और खुद को भुला डाला पाके भक्ति खज़ाने को।।

2.खुशियों से भरा यह दिल जिसका ही नहीं है हिसाब।
    पाके दौलत तेरे दीदकी भरगई दिल की कोरी किताब।
      प्यास जन्मों कीअब है मिटीमिली शमा परवाने को।।

3.अब आते न चरणों में हम मौजों की रवानी में।
    बहुत भारी खता करते डूबते गहरे पानी में।
     अब तो बाकी है यह ज़िन्दगी नाम तेरा ही ध्याने को।।

4.गुरु रखना दया की नज़र अपने चरणों में दीजे जगह।
   भटके ना यह सुरति मेरी सुनो सतगुरु यही इल्तेजा।
     गिरता हूँ उठा लेना इस ""प्रेमी'' दीवाने को।।

Friday, July 22, 2016

तेरा हर इक कम्म है कमाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।

टेकः-तेरा हर इक कम्म है कमाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।
     कोई वेखया न होर तेरे नाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।।

1.   बदलाँ विच डोलदा ते लहरां विच डोलदा।
          तारेंयां च वसदा ते फुल्लां विच हसदा।
               हर वस्तु विच जलवे विखावंदा।।
2.   डुबदे बेड़यां नूं कण्डे उत्त्ते लावें तूं।
          अग्ग दे अँगारेयां चों आन के बचावें तूं।।
               तूं ते पानी विच दीवयां नूं बालदा।।
3.   जगह जगह सूरज ते चन्न दीयां लोवां ने।
          जगमग लाई होई जग उत्ते दोवां ने।।
               तू है पत्थरां च जीवयाँ नूं पालदा।।
4.   कारीगरी अपनी तूं सबनूं विखाई ऐ।
          सब विच वस्स के शक्ल लुकाई ऐ।।
               ओ तैनू सारा ही जमाना फिरे भालदा।।


Monday, July 18, 2016

-कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।

तर्ज़--चल उड़ जा रे पँछी----।
टेक--कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।
1.   बालापन तूने खेल गँवाया मौज़ में बीती जवानी।
        वृद्ध हुआ तन थर थर कांपे कौन करे निगरानी।
           हाय हाय अन्त में तेरी बीत गई जिन्दगानी।
              फिर भी तू सोया गफलत में और सँभल न पाया।।

2.   रिश्ते झूठे नाते झूठे झूठे से तू प्यार करे। 
        मतलब के वो संगी साथी जिनका तू एतबार करे।
           साथ न देंगे तेरा जिनकी चिन्ता बारम्बार करे।
           अन्त समय में किसने किसका जग में साथ निभाया।।
3.   दिन दिन घटती आयु तेरी तू कहता मैं जवान हुआ।
        काल खड़ा है सर पे तेरे ऐसा क्यों नादान हुआ।
           जो है बचाता काल भँवर से उससे क्यों अन्जान हुआ।
              कैसे होगी मुक्ति तेरी अब तक न गुण गाया।।

4.   जब मिल जाये सतगुरु पूरा हर मुश्किल आसान करे।
        जन्म जन्म के तोड़ के बन्धन प्रगट में भगवान करे।
           सूने जगत जीवन पे तेरे सतगुरु ही एहसान करे।
              समझ गया है वो ही बन्दा गुरु शरण जो आया।।

Friday, July 15, 2016

टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।

तर्ज़--मिलती है ज़िन्दगी मे----।
        टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।
                कदमों में उनके अपना सब कुछ लुटा के देख।।
        1.        तेरी सूनी ज़िन्दगी में आ जायेगी बहार।
                तस्वीर सतगुरु की दिल में बसा के देख।।
        2.        सतगुरु की मौज में ही रहने में है भला।
                जिन्दगी को उनकी मौज मुताबिक बना के देख।।
        3.        तेरे रास्ते की सारी टल जायेंगी बला।
                राहे मारफत में उनको राहबर बना के देख।
        4.        तेरे दिल की दुनियाँ होगी नूरे मारफत से रोशन।
                दुई का पर्दा अपने दिल से उठा के देख।।
        5.        दुनियाँ के रंज़ो गम से तू पायेगा निज़ात।
                तसव्वर में सतगुरु के खुद को भुला के देख।।
        6.        सोहबत में आरिफों की मिलता है सुख हकीकी।
                महफिल में उनकी बन्दे इक बार आ के देख।।
        7.        हमदर्द जीव के हैं फक्त सतगुरु जहान में।
                कदमों में उनके अपने दिल को लगा के देख।।
        8.        सतगुरु हैं मेहरबां ते सब जग है मेहरबाँ।
                तू उनको दास अपना मेहरबाँ बना के देख।।

Wednesday, July 13, 2016

दिन खुशियां दा आया है हज़ूर दातिया,

तर्ज- रहे बखशदां तू किथे होवे
मुखड़ाः- दिन खुशियां दा आया है हज़ूर दातिया,
अज यह दिन मनावेंगे हज़ूर दातिया


1    देवां सबनॅूं वधाई मैं शुभ दिन दी, देवां सबनूं वधाई मैं दर्शन दी
सारी संगत हैं आईयां बड़ी दूरों दातिया, आज यह दिन--

2    चरणां विच तेरे सारे सुख बसदे, चारों पासे अज तेरी मेहर बरसे
इको अर्ज़ है मेरी ए हज़ूर दातिया, आज यह दिन--

3    अखां विच मेरे दरस वसदे, प्यार तेरे दा मिहं बरसे
मेरी विनती करीं तू मन्ज़ूर दातिया, आज यह दिन--

4    दरस तेरे नू सब तरसें, प्यास जगी मन विच सब दे
रहंदा अंखा विच मेरी तेरा नूर दातिया, आज यह दिन---

5    जे किृपा ते मेहर मिल जाए तेरी, खुशियां तों झोली भर जाए मेरी
दुख किते है न सब दे दूर दातिया, आज यह दिन--

Sunday, July 10, 2016

श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा

तर्ज़ः-   अकले हैं चले आओ
मुखड़ाः- श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा
यही जीवन का मक्सद हो हमारा

1    तुम्हीं आँखों की ठंडक, जिगर का सहारा
वैकन्ठों से भी बढ़कर, तेरा दीदार प्यारा--श्री दर्शन

2    करे जीवन को उजज्वल, तुम्हीं वो रोशनी हो
जो आकर फिर न जाए, वही साची खुशी हो--

3    तुम्हें दिल में बसाकर, नैयन से नीर बहाऊॅं
ये दासन दास चाहे, प्रभू तुझ को रीझाऊं।

Tuesday, July 5, 2016

मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना



मैं लज पाला....
मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना
मेरे सिर पर सदा अपनी, प्यार की एक नज़र रखना
मेरे जीवन की नइया को प्रभू जी पार तू करना--मेरे साहिबा

1    
तू सुनता है पुकारों को, जो ह्नदय से निकलती हैं
अर्जियां लेकर मैं आया हूँ, मेरे मालिक दया करना

2    
यूं तो हर कोई लेता है, सहारे अपने लोगों के(दुनिया वालों के)
मेरा तो एक सहारा तू, मुझे अपनी शरन रखना

3    
जहां देखूं वहां तुम हो, मुझे ऐसी नज़र दे दो
मेरे मन में मेरे दिल में, सदा तुम ही बने रहना,

4    
दास मुझको है डर किसका, मेरा है पीर लासानी
मेरे मुर्षीद मेरे मालिक, मेरे सिर हाथ तुम रखना
सदा ही पास तुम रखना, सदा तुम साथ में रहना

Saturday, July 2, 2016

लब पे रहेगा तेरा नाम ओ सतगुरु, आख्रिी दम तक

मुखड़ाः-  लब पे रहेगा तेरा नाम ओ सतगुरु, आख्रिी दम तक
आख्रिी दम तक-2 अगले जन्म तक,
अगल जन्म नहीं जन्म जन्म तक

1आपने मुझको काग से हसं बना डाला
एसा पिलाया, अमृत रस का वो प्याला
पड़ता रहेगा तुम से काम, ओसतगुरु

2      आपने ही तो प्रेमी मुझे बनाया है
जग में कैसे रहूंॅ ये भी तो सिखाया है
नहीं भुलूंगी अहिसान, ओ सतगुरु

3तेरे प्यार ने मेरी होंष गवांई है
भटिकी सुरती चरणों संग लगाई है
यादि आयेगी सुबह षाम, ओ सतगुरु