Sunday, August 28, 2016

मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।

तर्ज़--साजन साजन-------।
 टेक--मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।
नहीं ताकत मुझमें करूँ जो ब्यान।।

1.        छोड़ अर्श को फर्श पे आये हो तुम।
अपने भक्तों के दिल की पुकार को सुन।
रहमत के सागर तुम भगवान।।

2.        लाखों कष्ट उठाये हमारे लिये।
गम चिन्ता फिकर सब दूर किये।
नहीं तुझसा कोई दुनियाँ में दयावान।।

3.        देकर नाम का धन कर दिया भरपूर।
भर दिया मेरे दिल में अपना ही नूर।
करूँ क्यों न अपनी किस्मत पर मान।।

4.        तेरा दामन नहीं छोड़ेंगे कभी।
दास तुझपे निसार करेंगे ज़िन्दगी।
जब तक मेरे इस तन में हैं प्राण।।

Wednesday, August 24, 2016

री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।

तर्ज़-रामचन्द्र कह गये-------।
        टेक-श्री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।
                जिसमें भला हमारा है यह भेद हमें बतलाते हैं।।

        1.        सतगुरु जैसा मीत नहीं कोई, और जगत में पाया है।
                भूले भटके जीवों को जो, राह सीधी दिखलाते हैं।।

        2.        निर्भर अपने ख्यालों पे है, जीव का दुःखी सुखी होना।
                इसीलिये ये सतसंगत की, महिमा सदा फरमाते हैं।।

        3.        अपने साथ मिलाने आये, पर उपकारी सतगुरु मेरे।
                जिनकी संगत सोहबत से,बिगड़े कारज बन जाते हैं।।

        4.        वही सुखी प्राणी है जग में, जिन्हों को प्रभु प्यार मिला।
                जगत की झूठी मोह ममता में, वह न कभी भरमाते हैं।।

        5.        दासनदासा गुरु वचनों का, मिला जो हमें खज़ाना।  
                वही राह अपनायें सदा, जिस राह पे सन्त चलाते हैं।।

Monday, August 22, 2016

बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।

तर्ज़--पूजो पूजो रे प्रेमियों-------।
टेक--बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।
बाँधा जिसने भी प्रेम का धागा रे-2 ।
उसकी रक्षा करेंगे बन के साथी।।   

1. पक्का धागा ऐसा बाँधो डोर न टूटने पाये।
    हर संकट से उनको बचाते जो शरण में आये।
    बाँधा जिसने भी-------।।
   
2. प्रेम का धागा बाँधो भाई आज है राखी आई।
    सतगुरु को हमराज़ बना लो जो लोक परलोक सहाई।
     बाँधा जिसने भी-------।।

3. बहना जैसी प्रीत तू रखना सतगुरु संग ऐ दासा।
   भ्रातः जैसा नेह रखेंगे तुम संग सतगुरु दाता।
    बाँधा जिसने भी-------।।

4. सतगुरु तेरा राहबर साचा सबके हैं हितकारी।।
    बाँध के डोरी सतगुरु को तू सौंप दे ज़िम्मेवारी।
    बाँधा जिसने भी--------।।

Thursday, August 18, 2016

क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।

तर्ज़--    कोई जब राह न पाये------।
टेक--    क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।
    कि तुझ से नेह लगाये, पाये वही धन सार।।
  
1.    पाकर तेरा साचा प्यार।
      नाश होवे मोह का अंधियार।
        भूल जाये उसको संसार।
        तेरे ही गुण गाये न और कुछ चाहे।।
  
2.    कंगले से होवे धनवान।
      प्रीत तेरी का पीकर जाम।
        दुनियाँ से फिर क्या उसको काम।
        तन मन तुझ पे लुटाये कि तेरा बन जाये।।
  
3.    दासा सतगुरु हैं सुखधाम।
      कैसा प्यारा प्यारा है नाम।
        सबसे ऊँचा है इनका धाम।
        निज घर को वह पाये जो आप मिटाये।।

Sunday, August 14, 2016

तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।

तर्ज़-दिल दा मामला है-----।
टेक-तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।
कुर्बान जानों तन प्रभु जी तुम्हारे वास्ते हर वक्त तरसे मन।।
1.मैं हूँ तेरा पुजारी तेरे दर का भिखारी।
   माया से ठोकर खाके आया मैं शरण तिहारी।
    तेरा सच्चा द्वारा मुझको देना सहारा।
     बिगड़ी बनाये पल में तेरा बस एक इशारा।
      तेरे बिन कौन सुनेगा ये दिल का दर्द हमारा।
       हो पीड़ा हरो सजन तेरा ही आसरा है।।
2.मेरी है जान तू ही धर्म ईमान तू  ही।
   दिल में बसा के रखूँ मेरा भगवान तू ही।
    तेरा ही सब कुछ स्वामी मान अभिमान तू ही।
     मेरा मुझमें कुछ नहीं जो किछु है सो तोय।
      तेरा तुझको सौंप दूँ क्या लगेगा मोय।
       मेरी है शान तू ही मेरी ज़ुबान तू ही।
        जीवन के इस कमरे का मालिक मकान तू ही।
         मुर्दों में जान जो फूँके ऐसी मुस्कान तू ही।
          हो तुझसे लगी लगन तेरा ही आसरा है।।
3.तेरा दीवाना हूँ मैं तेरा मस्ताना हूँ मैं।
   शमां पे जो मिट जाये वही परवाना हूँ मैं।
    तुझपे सब कुछ लुटा दूँ और खुद को मिटा दूँ।
     सब कुछ है तेरा प्रभु चरणों में भेंट क्या दूँ।
      तू है सुख का समुन्दर नन्हा सा मैं कतरा हूँ।
       हो चाहूँ तेरा करम तेरा ही आसरा है।।

Wednesday, August 10, 2016

-जे संगतो तुसाँ गुरां जी नूँ पाना ए।

  तर्ज़ः-तेरी हाँ तेरी---
टेकः-जे संगतो तुसाँ गुरां जी नूँ पाना ए।
     आरती पूजा ते आया करो सोहने गुरां जी दे दर्शन पाया करो।।

1.   चन्न जेहा मुखड़ा ते सोहनी जेही चाल ए।
        नीवाँ नीवाँ चोला नाले गल विच हार ए।
            सीस ते रुमाल ए, आके तिलक लगाया करो। सोहणे---।।
2.   ढोलकी वजावां नाले चिमटा वजावाँ।
        दर तेरे आके सोहने भजन वी गावाँ।
            मेरे नाल ताल मिलाया करो, सोहणे----।।
3.   जेहड़े तेरे दर उत्ते रोज-रोज आंदे ने।
        आके सोहने शाम जी दे दर्शन पाँदे ने।
            गुराँ जी दी महिमा गाया करो, सोहणे----।।
4.   दासनदासी मैं वी दर तेरे आई हाँ।
         श्रद्धा ते प्रेम दे पुष्प लै आई हाँ।
             चरणाँ च शीश झुकाया करो, सोहणे----।।

Saturday, August 6, 2016

गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।

  तर्ज़-बाबुल की दुआएं-----।
    टेक-गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।
        इस विरह व्यथा को हे गुरुवर हम सब कैसे सह पायेंगे।

    1.  पाकर सानिध्य तुम्हारा प्रभु हमको आनन्द अपार हुआ।
            श्री मुख मण्डल को देख देख मेरा सपना साकार हुआ।
               सत्संग की बहती धारा में हम भूल गये तुम जाओगे।

    2.  भक्ति हो मेरे इस तन में हो भक्ति भाव मेरे मन में।
            भक्ति की धारा रग रग में भक्ति हो पूरे जीवन में।
               आस लगाये बैठे हैं प्रभु यह वर तुमसे पायेंगे।

    3.  करूणामय करूणा के सागर करूणा कर दो हम हैं बालक।
            यह अर्ज़ हमारी तुमसे है जल्दी आना मेरे प्रतिपालक।
               हम  नैन बिछाये बैठेंगे तुम याद बहुत ही आओगे।

Tuesday, August 2, 2016

आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।

तर्ज़-जानां ओ मेरी जानां----।
टेक-आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।
     प्यासा हूं मैं प्यासा आके मेरी प्यास बुझाना।।

1.   नयना हैं व्याकुल और राह तेरी निहारूँ।
        दूर है मन्ज़िल तुझको कहां पुकारूँ।।

2.   भटका हूँ बहुत और न भटकाना।
        जग ने सताया है तू तो न सताना।।

3.   सूरत दौलत शोहरत न तुझसे चाहूँ।
        प्यार भक्ति और तेरे दर्श गुरु पाऊं।।

4.   तेरा यह प्यारा रूप नयनों में बसाके।
        मस्त हुआ ""प्रेमी'' तुझे पलकों में छुपा के।।