Sunday, October 2, 2016

दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।

तर्ज़-रेशमी सलवार-----।
टेक-दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।
        गायेंगे हम तेरे सदा गुणगान प्रभु।।

1.    तेरे चरणों में हम हैं आये, दिल में यह ले कर आसा।
    तेरी पावन भक्ति का ही, मनुआ सदा रहे प्यासा।
                                 करो एहसान प्रभु।।
2.    तेरी अनुपम भक्ति की महिमा, जाए न ज़ुबाँ से बखानी।
    जिस पे किरपा हो तेरी, पाता वही है प्राणी।
                                कि सुख की खान प्रभु।।
3.    तेरी भक्ति बिना ऐ स्वामी, कई जन्म हैं हम ने गँवाये।
    मन माया के धोखे में आकर, हैं कितने कष्ट उठाये।
                                करो कल्याण प्रभु।।
4.    श्री चरणों की भक्ति की बख्शिश, हम पर सतगुरु जी कर दो।
    खाली झोली है हमारी, इसे अपनी भक्ति से भर दो।
                                जायें कुरबान प्रभु।।
5.    हम जन्म जन्म दाता जी, तेरे दासनदास कहायें।
    तेरी पावन भक्ति करके, जीवन को सफल बनायें।
                                दे दो वरदान प्रभु।।

Sunday, September 25, 2016

सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है,

तर्ज- दुल्हे का सेहरा
रुबाईः-शहनाईयों की सदा कह रही है,
जन्मदिन की मुबारक घड़ी आ बई है
सजे चादं तारों में वह कमाल दिख रहें हैं,
 ज़मीं पे फल्क से मेरे भगवन आ गये हैं

मुखड़ाः-सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है, खुषियों में आज सब का मन हर्षाया है
जगमग ज्योति जगी है सबके हिरदे में, धरती पर भगवान हमारा आया है

1    तेरी रहमत का सदा यूं, हाथ हो सिर पर,
तेरा सुमरण तेरा दर्षन, करूं तेरे दर पर
तेरा यह दर्षन सुहाना पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

2    खूबसूरत यह जो घड़ियां आज आई हैं
आज जन्मदिन की लाखों लाख वधाई है
सुन्दर यह सुहाना दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है

3    तेरे जेसा रूप न देखा चादॅं सितारों में
ऐसा यह नूरानी जल्वा नहीं बहारों में
प्रेमियों ने आज तुमको पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

4    आज तेरे दर पर सचखंड का नज़ारा है
       त्रिलोकी में तेरे जेसा नहीं द्वारा है
दासों ने यह दिव्य दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है



Friday, September 16, 2016

जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।

तर्ज़--इक परदेसी मेरा दिल----।
टेक--जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।
    आके मेरी अँखियाँ दे अन्दर विराज।।

1.    मिटया अन्धेरा दुःख दर्द मेरा।
        पाया जो दर्शन सतगुरु जी तेरा।
           मेरी ज़िन्दगी दी बड़भागी दिन आज।।

2.    अखियाँ विच वस जा प्राणाँ विच वस जा।
         अँग अंग विच मेरे सतगुरु जी रच जा।
          तैनूँ पाके रहवाँ न किसे दा मोहताज।।

3.    बेड़ी पुरानी गहरा पानी।
       तेरी ही आस मैंनूँ तूं ही पार लगानी।
          तू मल्लाह तेरा नाम है जहाज़।।

4.    दुनियाँ भुलाई आस गँवाई।
         तेरे बगैर मेरा कोई न सहाई।
            दास बेचारे दे सँवार दे काज।।

Monday, September 12, 2016

हर पासे अज रौनकाँ बहारां,

तर्ज़-पहलां सतगुरु नूं अपना----।
टेक-हर पासे अज रौनकाँ बहारां,निराला कोई पीरआ गया।
    इस घड़ी उत्तों की कुझ वारां,मैं सोहणा दीदार पा लिया।।
                            कि धरती ते रब आ गया।।
1.धुरधाम तों उतरी ऐ शक्ति,चौकुण्ठी विच महिमा फैली।
     इसदे रूप दा वेख लिशकारा, जग ते निहाल हो गया।।

2.रामकृष्ण कदी नानक बनदे,हरयुग विचआंदे रूप बदल के।
  हुण रूप निराला ऐ धारा, कि भक्तां दे दिल नूं भा गया।।

3.प्रेमी जनां नूं छाई मस्ती, वेख के प्यारी सोहणी झाँकी।
    दीवाना बनाया जग सारा, निराला कोई पीर आ गया।।

4.ब्राहृा विष्णु स्तुति गाँदे, ऋषि मुनि सारे ध्यान लगांदे।
   मंगदे चरणां दा ओह वी सहारा,तेरे नाल दिल ला लिया।।

5        युगयुगराजकरोरहोसलामत,रोशन जहां मेरा तेरे नाल मालिक
          रहे सिर ते अटल तेरा साया, तेरे नाल प्यार पा लिया।।
6.    सब नूं मुबारिक कोटि मुबारिक 20 सितम्बर मुबारक।
    अज दा दिन बड़ा करमां वाला,कि मैं ता मालामाल हो गया।।
                            कि मैं ताँ निहाल हो गया।।

Thursday, September 8, 2016

दुःखी जीवों की सुन के विनय,

टेकः-दुःखी जीवों की सुन के विनय, प्रभु ने अवतार लिया।
     खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, चहुँ दिशी जयकार हुआ।।

1. दिन बीस सितम्बर का, सन् उन्नीस सौ छब्बीस था।
     छोड़ अपना धाम प्रभु जग में अवतार लिया।।
        पंचम रुप में प्रकट हो, जीवों को दीदार दिया।।
2. पाप धरती पे जब था बढ़ा मच रही थी हाहाकार।
     आए जगत में कुल मालिक, करने सृष्टि का उद्धार।।
        यही लक्ष्य है इनका केवल, दुनियाँ में आने का।।
3. भेष सन्तों का धर कर, युग युग प्रभु आते हैं।
     भूली भटकी रुहों को, सतमार्ग दिखाते हैं।।
        अपने श्री चरणों का, देते हैं सहारा सदा।।
4. हम जीवों पे प्रभु ने, किया कितना है उपकार।
     प्रेमा भक्ति का अनुपम यह खोला है दरबार।।
        बलिहार सदा जाएं, एहसान जो हमपे किया।।
5. हम जीवों की प्रभुवर, बस यह है अभिलाषा।
     तेरे भिक्षुक बन करके, तेरे द्वारे पे रहें सदा।
        श्री चरणों के दास बने, करें निशदिन दर्श तेरा।।

Thursday, September 1, 2016

पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं

तर्ज़--जी मैं लख लख खुशियाँ------।
    टेक--पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं सुखाँ दा भण्डार पा लिया।
            सतगुराँ जी नूं अपना बणा के नवाँ संसार पा लिया।।
    1.        बहुत गुराँ जी दी होई मेहरबानी ए।
              बख्शी जिन्हाँ ने सच्ची दात रुहानी ए।
                सुत्ते जाग पये कर्म ने मेरे जो साहिब दा दीदार पा लिया।।
    2.        गुरु दरबार दी ऐ ही पढ़ाई ऐ।
              सिधी ऐही गल जिन्दी समझ विच आई ए।
                बहुत लोड़ नहीं पढ़न पढ़ान दी भेद असाँ सार पा लिया।।
    3.        मोह माया ने पाया सी घेरा।
              रंग ढंग सारा बिगड़िया सी मेरा।
                ऐसा प्रेम दा जादू चलाया बन्धन तो छुटकार पा लिया।।
    4.        शरण गुराँ दी असीं जे न आँदे।
              पता नहीं कित्थे कित्थे धक्के होर खाँदे।
                पुण्य कर्म दी ऐही निशानी ऐ सच्चा दरबार पा लिया।।
    5.        उपकार गुराँ जी दे किवें सुनाईये।
              चरण कमल सदा ह्मदय वसाईये।
               जेहड़ा सबनूँ बख्शनहारा ओ सच्चा करतार पा लिया।।
    6.        दास गुराँ जी दा द्वार न छोड़ीं।
              गुरु सेवा तो कदी मुँह न मोड़ीं।
                जेहड़ी शै न कित्थे मिलदी ऐत्थे औ भण्डार पा लिया।।

Sunday, August 28, 2016

मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।

तर्ज़--साजन साजन-------।
 टेक--मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।
नहीं ताकत मुझमें करूँ जो ब्यान।।

1.        छोड़ अर्श को फर्श पे आये हो तुम।
अपने भक्तों के दिल की पुकार को सुन।
रहमत के सागर तुम भगवान।।

2.        लाखों कष्ट उठाये हमारे लिये।
गम चिन्ता फिकर सब दूर किये।
नहीं तुझसा कोई दुनियाँ में दयावान।।

3.        देकर नाम का धन कर दिया भरपूर।
भर दिया मेरे दिल में अपना ही नूर।
करूँ क्यों न अपनी किस्मत पर मान।।

4.        तेरा दामन नहीं छोड़ेंगे कभी।
दास तुझपे निसार करेंगे ज़िन्दगी।
जब तक मेरे इस तन में हैं प्राण।।