टेकः-दुःखी जीवों की सुन के विनय, प्रभु ने अवतार लिया।
खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, चहुँ दिशी जयकार हुआ।।
1. दिन बीस सितम्बर का, सन् उन्नीस सौ छब्बीस था।
छोड़ अपना धाम प्रभु जग में अवतार लिया।।
पंचम रुप में प्रकट हो, जीवों को दीदार दिया।।
2. पाप धरती पे जब था बढ़ा मच रही थी हाहाकार।
आए जगत में कुल मालिक, करने सृष्टि का उद्धार।।
यही लक्ष्य है इनका केवल, दुनियाँ में आने का।।
3. भेष सन्तों का धर कर, युग युग प्रभु आते हैं।
भूली भटकी रुहों को, सतमार्ग दिखाते हैं।।
अपने श्री चरणों का, देते हैं सहारा सदा।।
4. हम जीवों पे प्रभु ने, किया कितना है उपकार।
प्रेमा भक्ति का अनुपम यह खोला है दरबार।।
बलिहार सदा जाएं, एहसान जो हमपे किया।।
5. हम जीवों की प्रभुवर, बस यह है अभिलाषा।
तेरे भिक्षुक बन करके, तेरे द्वारे पे रहें सदा।
श्री चरणों के दास बने, करें निशदिन दर्श तेरा।।
खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, चहुँ दिशी जयकार हुआ।।
1. दिन बीस सितम्बर का, सन् उन्नीस सौ छब्बीस था।
छोड़ अपना धाम प्रभु जग में अवतार लिया।।
पंचम रुप में प्रकट हो, जीवों को दीदार दिया।।
2. पाप धरती पे जब था बढ़ा मच रही थी हाहाकार।
आए जगत में कुल मालिक, करने सृष्टि का उद्धार।।
यही लक्ष्य है इनका केवल, दुनियाँ में आने का।।
3. भेष सन्तों का धर कर, युग युग प्रभु आते हैं।
भूली भटकी रुहों को, सतमार्ग दिखाते हैं।।
अपने श्री चरणों का, देते हैं सहारा सदा।।
4. हम जीवों पे प्रभु ने, किया कितना है उपकार।
प्रेमा भक्ति का अनुपम यह खोला है दरबार।।
बलिहार सदा जाएं, एहसान जो हमपे किया।।
5. हम जीवों की प्रभुवर, बस यह है अभिलाषा।
तेरे भिक्षुक बन करके, तेरे द्वारे पे रहें सदा।
श्री चरणों के दास बने, करें निशदिन दर्श तेरा।।
Thanks bhagat ji
ReplyDeletepls send tarj of this bhajan
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