Tuesday, June 28, 2016

मेरे मन में हुआ उजाला, सतगुरू दर्शन से

मेरे मन में हुआ उजाला, सतगुरू दर्शन से
मैने पाया सुख निराला सतगुरू दर्शन से--दर्शन से गुरू दर्शन से
1    कैसा सुन्दर शुभ दिन आया, सतगुरू ने चरणों में बुलाया
हुई शान्त ये मन की ज्वाला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
2    जन्म जन्म की भूखी प्यासी, बिन पानी ज्यों मीन उदासी
अब मिल गया अमृत प्याला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
3    आज खुशी से झूमूं गाऊॅं, दिल की हालात किसे सुनाऊॅं
हुआ रोम रोम मतवाला.सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
4    प्रेमी इस दर पे बलिहारी, सतगुरू ने की रहमत भारी
मेरी किस्मत का खुल गया ताला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से

Sunday, June 26, 2016

मुखड़ो: अवल करियां थो चरन निमाम; सतगुर दाता पूरन काम


तर्ज़ः  अवल निमायां सिरु गुरुदेव
मुखड़ो:  अवल करियां थो चरन निमाम; सतगुर दाता पूरन काम
 सतगुर दाता पूरन काम; कष्ट कटींदड़ सुखन जा धाम

1    आउं निमाणो तूं ईं प्रभू माणु; आउं निताणो तूं ईं प्रभू ताणु
आउं भुलयलु तूं बखष्णहार आउं पापी तूं पतति उधार

2    दुष्ट पंजई कनि कहरी काह; तिन खां बचाइजि षाहनषाह
नाहे हिम्मथ ऐं नाहे होंष;ठकु ठकिज तूं पड़दे पोष

3    तो बिन मुहिंजो कोन्हे हालु; तूं त पिता मां तुहिंजो बा्लु;
छा त कंदो तहिं कहिरी काल; रक्ष्क जहिंजो दीन दयाल

4    आंउ दासन दास तो दर ते; दूर करे छदि् दुख दर्द खे
हकूं नाहकूं रखु तूं राम; षरन अव्हां जे आहिंया ष्याम

Wednesday, June 15, 2016

टेक- तेरे नाम मे लगी हो इतनी लगन।

तर्ज़-मेरे प्यार की उमर हो-----।
शेयर-मिल करके सतगुरु तुम्हे खुश खूब हो गया हूँ।
      दुनियाँ की सारी दौलत दाता मैं पा गया हूँ।
       बख्शा मुझे खज़ाना अपने ही नाम का जो।
        उसको जपूँ हमेशा विनय ये कर रहा हूँ।
टेक- तेरे नाम मे लगी हो इतनी लगन।
       तेरे नाम में जीऊँ तेरे नाम में खतम।।
1.   नाम में तेरे दाता यूं खो जाऊं मैं।
       चारों तरफ बस तुझको ही पाऊँ मैं।
         तेरी प्रीत में बढ़ती रहे मेरी लगन।।

2.   मेरी सुरति स्वामी तुझ संग जुड़ी रहे।
       सब से सिमट कर तेरी ओर मुड़ा रहे।
         गुण गाऊं नाथ मैं तेरे ही हरदम।।

3.   इक टक छवि ये तेरी पल भर निहारूँ मैं।
       प्यारा तेरा नाम भगवन सदा ही उचारूं मैं।
         तेरी सेवा में हाज़िर है ये जानो तन।।

4.   प्रेमी ये तेरा प्रभु तुझ पे कुर्बान है।
       सब कुछ मिला है बस एक अरमान है।
         तेरे चरणों में अन्त समय निकले मेरा दम।।

Saturday, June 11, 2016

टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।

तर्ज़--तेरा मन दर्पण कहलाये-----।
            टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।
            जन्म जन्म की मोह ममता से निश्चय छूट वह जाये।।

1.            एक रत्ती भी नाम तेरे की जिस  घट में बस जाये।
                तम अज्ञान विनाशे सारा सुख साचा वह पाये।
                 घास के सूखे ढेर को जैसे ज़रा सी आग लगाये।।


 2.            जग सारा है खादिम उस का जिसका तू हो जाये।
                 छोड़ भरोसा औरों का जो तुझ से लौ लगाये।
                  दुनियाँ बेशक चाहे उसको पर वह तुझको चाहे।।

 3.            नाम की अदभुत महिमा तो सब सन्तों ने है गाई।
                 नाम बिना भव सागर तरना महाकठिन है भाई।
                  नाम से ही उज्जवल मुख होवे ठोकर कभी न खाये।

4.            दासन दासा नाम बिना झूठे हैं धन्धे सारे।
               नाम है तेरी अपनी पूँजी सोच समझ ले प्यारे।
               लोक परलोक का संगी साथी निज घर दे पहुँचाये।।

Thursday, June 9, 2016

टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।

तर्ज़--न झटको जुल्फ से पानी--।
टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।
     मेरे मुर्शिद तुझे अपना बनाने की तमन्ना है।।

1.   ये सिर तेरी अमानत है झुकेगा क्यों कहीं जाकर।
     इसे तेरे ही कदमों में झुकाने की तमन्ना है।।

2.   मुझे थी जुस्तजू जिसकी वह दाता तुम्हीं तो हो।
     तुम्ही को दिल के आसन पर बिठाने की तमन्ना है।।

3.   श्री चरणों में भक्ति प्रेम के दरिया मचलते हैं।
     श्री चरणों के सागर में नहाने की तमन्ना है।।

4.   बिछाया जो ना था अब तक किसी के सामने हरगिज़।
     वही दामन तेरे दर पर बिछाने की तमन्ना है।।

Tuesday, June 7, 2016

मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।

टेकः-मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।
     अम्बर का सूरज है, धरती का उजाला है।।

1.   तुम सामने होते हो फिर दूरी नहीं होती।
        दीदार की हसरत क्यों फिर पूरी नहीं होती।।
            तू कैसा जादूगर सतगुरु मतवाला है।।
2.   तुम पास नहीं होते फिर गम आ जाता है।
        तेरी याद में सतगुरु जी दिल शांत हो जाता है।
            कोई क्या जाने कैसे मैने दिल को सँभाला है।।
3.   हर घड़ी मेरी बीते सतगुरु तेरे चरणों में।
        दिल ऐसा लगे मेरा प्रभु तेरे दर्शन में।
            दिन रात पिता बनकर तूने मुझको सँभाला है।।
4.   त्रैलोकी के मालिक सब के रखवाले हो।
        तुम दास के स्वामी हो जग तारनहारे हो।
            समझेगा वही गुरुमुख जो समझने वाला है।।