तर्ज़--दिल लूटने वाले-----।
टेक--दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।
मालिक की भक्ति कमा करके इस जन्म का लाभ उठाना है।।
1.इस दुर्लभ देहि की महिमा सन्तों ग्रन्थों ने उचारी है।
इस जीवन की जो करता कदर उसे कीमत मिलती भारी है।
हर घड़ी हर पल हर स्वांस स्वांस मालिक का नाम ध्याना है।।
2.तेरे जीवन का जो मकसद है सतपुरुष तुझे बतलाते हैं।
अपने सुन्दर उपदेशों से प्रभु की पहचान कराते हैं।
सतगुरु की पावन सेवा कर लोक और परलोक बनाना है।।
3.है असली काम तेरा जग में केवल प्रभु की भक्ति करना।
सिवा इसके दीगर कामों में तुम चित को कभी नही धरना।
दुनियाँ के बखेड़ों में फँसकर मकसद को नहीं भुलाना है।।
4.यह लक्ष्य तभी होगा हासिल जब दास गुरु का बन जायेगा।
होगा जीवन सफल तेरा जब सतगुरु के गुण गायेगा।
चलकर श्री मौज और आज्ञा में सतगुरु प्यारे को रिझाना है।।
टेक--दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।
मालिक की भक्ति कमा करके इस जन्म का लाभ उठाना है।।
1.इस दुर्लभ देहि की महिमा सन्तों ग्रन्थों ने उचारी है।
इस जीवन की जो करता कदर उसे कीमत मिलती भारी है।
हर घड़ी हर पल हर स्वांस स्वांस मालिक का नाम ध्याना है।।
2.तेरे जीवन का जो मकसद है सतपुरुष तुझे बतलाते हैं।
अपने सुन्दर उपदेशों से प्रभु की पहचान कराते हैं।
सतगुरु की पावन सेवा कर लोक और परलोक बनाना है।।
3.है असली काम तेरा जग में केवल प्रभु की भक्ति करना।
सिवा इसके दीगर कामों में तुम चित को कभी नही धरना।
दुनियाँ के बखेड़ों में फँसकर मकसद को नहीं भुलाना है।।
4.यह लक्ष्य तभी होगा हासिल जब दास गुरु का बन जायेगा।
होगा जीवन सफल तेरा जब सतगुरु के गुण गायेगा।
चलकर श्री मौज और आज्ञा में सतगुरु प्यारे को रिझाना है।।