Thursday, October 27, 2016

इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।

तर्ज़-तुझे सूरज कहूँ या चन्दा----।
टेक-इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।
    दुनियाँ जिसे सीस झुकाती वो है दरबार तुम्हारा।।

1.गुरुदेव के दर्शन करना शुभ कर्मों का ही फल है।
  बिन भाग न दर्शन होते समझो यह बात अटल है।
  भगवान ने ही इस युग में लिया परमहँस अवतारा।।

2.प्रेमा भक्ति शान्ति का बस यही एक खज़ाना है।
  मिली सच्ची राहत उऩको जिन्होने इनको माना है।
   श्री मुख से रोज है बहती वचनों की अमृत धारा।।

3.यह परमार्थ का तकिया यह एक दरबार रूहानी।
  है फकीरी भी गोया यहाँ की है तख्ते सुलेमानी।
  छू लेता नील गगन को दरबार का जैकारा।।

4.सेवा सत्संग भजन के उपहार यहां से मिलते।
  पलटे हालत इस मन की अन्तर के पट हैं खुलते।
  जीवन रूपी कश्ती का दासा यही किनारा।।

Saturday, October 22, 2016

तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।

तर्ज़-बहुत प्यार करते हैं-----।
    टेक-तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।
         रूठे हो तुम जो मनायेंगे हम।।
    1.  जग से मिली है हार करारी।
           तभी तेरे दर पे है झोली पसारी।
              दुखड़ा ये दिल का सुनायेंगे हम।।
    2.  कर्मों के मारे तुझको पुकारें।
           जीये जा रहे हैं तेरे सहारे।
              आखिर तो मन्ज़िल को पायेंगे हम।।
    3,  तुम न सुनोगे कौन सुनेगा।
           पथ के ये काँटे कौन चुनेगा।
              भटके हुए कहाँ जायेंगे हम।।
    4.  दासनदास की ये ही पुकार।
           सदा मेरे दिल में हो तेरा ही प्यार।
              दर्शन तेरा पायेंगे हम।।

Tuesday, October 18, 2016

असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।

टेक-असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।
         मुखों जय जय गुरां दी बोल वे।।
    1.   ओदे नाम दी महिमा भारी।
             उत्थे जांदे ने कुल संसारी।
                चल तू वी न जीवन रोल वे।
                     छेती करले तू बिस्तर गोल वे।।
    2.   छड दुनियाँ दे झूठे चाले।
             सतगुरां दे दर्शन पाले।
                 क्यों फिरना तू डावांडोल वे।।

    3.   उत्थे तैंतीस करोड़ी देवता आउँदे।
             मेरे शाम जी दी महिमा नूं गाऊंदे।
                 नाले खुशियां दे वजदे ढोल वे।।

    4.   उत्थे नाम दी जोत पई जगदी।
             ज्ञान भक्ति दी गंगा वगदी।
                 तू वी भर लै अपनी झोल वे।।

    5.   चल पहली गड्डी ते चलिये।
             प्रेमी बुआ गुरां दा मलिये।
                 तेरा हीरा जन्म अनमोल वे।।

Friday, October 14, 2016

मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।

टेक-मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।
                 इक वारी प्यास बुझा जा वे।।
1.में रो रो देआं दुहाइयां वे, तेरे इश्के मार मुकाइयां वे।
    हुण सह ना सकां जुदाइयां वे, सुण मेरे महरम साँइयाँ वे।
      मेरे पीड़ करदे जख्मां दे, आके दीद दवाई लाजा वे। मेरा हाड़ा----।
2.मैं झूठ ना सज्जणा बोलां वे, मैं कुफ्र ना सज्जणा तोलां वे।
    तेरे इश्के मैनूं फूक दित्ता, दिल सड़ के होया कोला वे।
      इह दस्सण वाली गल्ल नहीं, मैं कित्थे पावां रौला वे।
        मुड़के इश्के दी अग्ग भखा के ते, कोले नूं सुर्ख बणाजा वे।
3.प्यार पाउण तों पहलों जाणू सै, इह प्यार निभाउणा पैणा है।
    इस प्यार विच सज्जणा सुख कित्ते, कुझ कष्ट उठाउणा पैणा है।
      हुण पैंडा सज्जणा छुटणा नहीं, तैनूं दीद दखाउणा पैणा है।
        दीद बूंद तों  प्यासी मर गई जे, पिछों भावें बण घटा आजा वे।
4.जो इश्क तेरे नाल लाया है, नाल जान मेरी दे जावेगा।
    इह रोग अवल्लड़ा लगिआ है, जो मैनूं मार मुकावेगा।
      इहदी इक्को ही दीद दवाई है, जो तेरे कोल बताई है।
        इक पल वी मेरी आस नहीं, तूं समझें रोगी खास नहीं।
           फिर पुछेगंा तूं सज्जणा वे, इह किसदा है जनाजा वे।
5.जे सज्जणा तूं नहीं आ सकदा, जे मुखड़ा नहीं दिखा सकदा।
   खैर प्यार दी जे नहीं पा सकदा, जे कष्ट तूं नहीं उठा सकदा।
    मैं कष्ट तैनूं हुण देणा नहीं, बस फिर कदे वी कहणा नहीं।
      बस इक्को ही इच्छा मेरी जी, हुण जद वी पाओगे फेरी जी।
       इह मेरी सी बस गल्ल इतनी, मेरी कब्रा ते तूँ लिखवाजा वे।
           मेरा हाड़ा सज्ज्णा----।

Sunday, October 2, 2016

दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।

तर्ज़-रेशमी सलवार-----।
टेक-दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।
        गायेंगे हम तेरे सदा गुणगान प्रभु।।

1.    तेरे चरणों में हम हैं आये, दिल में यह ले कर आसा।
    तेरी पावन भक्ति का ही, मनुआ सदा रहे प्यासा।
                                 करो एहसान प्रभु।।
2.    तेरी अनुपम भक्ति की महिमा, जाए न ज़ुबाँ से बखानी।
    जिस पे किरपा हो तेरी, पाता वही है प्राणी।
                                कि सुख की खान प्रभु।।
3.    तेरी भक्ति बिना ऐ स्वामी, कई जन्म हैं हम ने गँवाये।
    मन माया के धोखे में आकर, हैं कितने कष्ट उठाये।
                                करो कल्याण प्रभु।।
4.    श्री चरणों की भक्ति की बख्शिश, हम पर सतगुरु जी कर दो।
    खाली झोली है हमारी, इसे अपनी भक्ति से भर दो।
                                जायें कुरबान प्रभु।।
5.    हम जन्म जन्म दाता जी, तेरे दासनदास कहायें।
    तेरी पावन भक्ति करके, जीवन को सफल बनायें।
                                दे दो वरदान प्रभु।।